अपने स्कूल के दिनों में हममें से कई लोगों ने ये कविता पढ़ी या गाई होगी. कवि सत्यनारायण लाल की इस कविता का किसान सुबह उठकर अपने बैलों के साथ खेत में जाता है. खेती करता है. बीज बोता है और अच्छी फसल के लिए मेहनत करता है. लेकिन आज जब आप ये ख़बर पढ़ रहे हैं तो किसानों का एक बड़ा समूह जोकि देशभर से दिल्ली के रामलीला मैदान में जमा हुआ है. चिड़ियों के उठने से पहले उठा तो है, लेकिन वो हल लेकर खेतों में नहीं जा रहा है. वो झंडे, तख़्तियां और पर्चे लेकर संसद की तरफ बढ़ रहा है. किसानों का यह समूह देश की संसद से मांग कर रहा है कि आप 20 दिनों का एक विशेष सत्र बुलाएं और किसानों से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करें. नियम बनाएं, कानून बनाएं. कुछ भी करें, हमें राहत दें.
किसानों को अंदाजा है कि वो बड़ी संख्या में देश की राजधानी में दाख़िल हुए हैं. व्यस्त ट्रैफिक वाली सड़कों पर पैदल मार्च किया है और कर रहे है. उन्हें इस बात का भी अंदाजा है कि इस वजह से आम शहरी जो कि अपनी नौकरी या कामकाज पर जा रहा है उसे दिक्कत हुई होगी. ट्रैफिक पुलिस ने कुछ रास्ते बंद कर दिए होंगे और कुछ रास्तों पर ट्रैफिक की गति कम हो गई होगी.
और इस वजह से किसानों ने दिल्ली वालों के नाम एक खुला पत्र जारी किया है जो पर्चे की शक्ल में हैं और पिछली रात से ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
इससे पहले कि हम आपको ये बताएं कि इस पर्चे में क्या लिखा हुआ है. कुछ याद करवाना ज़रूरी है. इसी साल मार्च में हज़ारों किसान पुणे से मुम्बई पैदल मार्च करके पहुंचे थे. मुम्बई में उन्हें विधानसभा भवन के पास पहुंचना था. लेकिन जब किसानों को मालूम चला कि अगले दिन बच्चों की परीक्षाएं हैं तो उन्हें रात में ही चलने का फैसला किया. लगभग दो सौ किलोमीटर की पैदल यात्रा कर चुके हज़ारों किसान पूरी रात चले और मुम्बई में अपने लिए तय स्थान पर पहुंचे ताकि अगली सुबह जिन बच्चों को परीक्षा में शामिल होना है उन्हें कोई दिक्कत ना हो.
हां, तो अब उस पर्चे की बात जो दिल्ली में आ चुके किसानों ने दिल्ली वालों के लिए जारी किया है. पर्चे में सबसे पहले तो शहरी लोगों से माफ़ी मांगी गई है. लिखा गया है, ‘माफ़ कीजिए! हमारे इस मार्च से आपको परेशानी हुई होगी.’
पर्चे में आगे यह समझाने की कोशिश की गई है कि किसान किसी को परेशान करने की नियत से दिल्ली में दाख़िल नहीं हुए हैं. चूंकि वो खुद परेशान हैं इसलिए अपनी परेशानी सरकार को सुनाने-बताने यहां आए हैं.
किसानों को अंदाजा है कि वो बड़ी संख्या में देश की राजधानी में दाख़िल हुए हैं. व्यस्त ट्रैफिक वाली सड़कों पर पैदल मार्च किया है और कर रहे है. उन्हें इस बात का भी अंदाजा है कि इस वजह से आम शहरी जो कि अपनी नौकरी या कामकाज पर जा रहा है उसे दिक्कत हुई होगी. ट्रैफिक पुलिस ने कुछ रास्ते बंद कर दिए होंगे और कुछ रास्तों पर ट्रैफिक की गति कम हो गई होगी.
और इस वजह से किसानों ने दिल्ली वालों के नाम एक खुला पत्र जारी किया है जो पर्चे की शक्ल में हैं और पिछली रात से ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
इससे पहले कि हम आपको ये बताएं कि इस पर्चे में क्या लिखा हुआ है. कुछ याद करवाना ज़रूरी है. इसी साल मार्च में हज़ारों किसान पुणे से मुम्बई पैदल मार्च करके पहुंचे थे. मुम्बई में उन्हें विधानसभा भवन के पास पहुंचना था. लेकिन जब किसानों को मालूम चला कि अगले दिन बच्चों की परीक्षाएं हैं तो उन्हें रात में ही चलने का फैसला किया. लगभग दो सौ किलोमीटर की पैदल यात्रा कर चुके हज़ारों किसान पूरी रात चले और मुम्बई में अपने लिए तय स्थान पर पहुंचे ताकि अगली सुबह जिन बच्चों को परीक्षा में शामिल होना है उन्हें कोई दिक्कत ना हो.
हां, तो अब उस पर्चे की बात जो दिल्ली में आ चुके किसानों ने दिल्ली वालों के लिए जारी किया है. पर्चे में सबसे पहले तो शहरी लोगों से माफ़ी मांगी गई है. लिखा गया है, ‘माफ़ कीजिए! हमारे इस मार्च से आपको परेशानी हुई होगी.’
पर्चे में आगे यह समझाने की कोशिश की गई है कि किसान किसी को परेशान करने की नियत से दिल्ली में दाख़िल नहीं हुए हैं. चूंकि वो खुद परेशान हैं इसलिए अपनी परेशानी सरकार को सुनाने-बताने यहां आए हैं.
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